Unlawful wealth surely gives happiness to one in the start.. but later on it takes you and throws you into the sea of sadness... where you will never ever see the shores of happiness.
हराम की दौलत इन्सान को सुरु शुरू में सुख ज़रूर देलाती है .... मगर बाद में ले जाकर एक आइसे दुःख के सागर में धकेल देती है... जहा मरते दम तक सुख का किनारा कभी नज़र नहीं आता है.: कादर खान का डैलोक है और फिल्म का नाम है "जैसी करनी वैसी भरनी" जो ऊपर के पिच्क्चार पे सटीक बैठता है.
हराम की दौलत इन्सान को सुरु शुरू में सुख ज़रूर देलाती है .... मगर बाद में ले जाकर एक आइसे दुःख के सागर में धकेल देती है... जहा मरते दम तक सुख का किनारा कभी नज़र नहीं आता है.: कादर खान का डैलोक है और फिल्म का नाम है "जैसी करनी वैसी भरनी" जो ऊपर के पिच्क्चार पे सटीक बैठता है.
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